
मुर्गी पालन – भारत एक कृषि प्रधान देश है, जहाँ ग्रामीण आबादी का अधिकांश हिस्सा खेती और उससे जुड़े व्यवसायों पर निर्भर करता है। आज के समय में केवल खेती से पर्याप्त आय प्राप्त करना कठिन होता जा रहा है। ऐसे में किसान और ग्रामीण युवा अतिरिक्त आय के स्रोत खोज रहे हैं। इन्हीं विकल्पों में से एक है – मुर्गी पालन (Poultry Farming)।
मुर्गी पालन एक ऐसा व्यवसाय है जो कम निवेश में शुरू किया जा सकता है और बहुत जल्द आय का स्रोत बन जाता है। इसमें अंडे और मांस दोनों की बिक्री से आय होती है। भारत में मुर्गी पालन का बाजार तेजी से बढ़ रहा है और आने वाले समय में इसमें अपार संभावनाएँ हैं।
मुर्गी पालन क्या है?
मुर्गी पालन का अर्थ है – नियंत्रित तरीके से मुर्गियों का पालन-पोषण करना ताकि उनसे अंडे और मांस का उत्पादन किया जा सके। इसमें मुर्गियों को संतुलित आहार, उचित आवास और स्वास्थ्य सुविधाएँ दी जाती हैं।
मुर्गी पालन दो मुख्य उद्देश्यों के लिए किया जाता है –
- लेयर फार्मिंग (Layer Farming): अंडे उत्पादन के लिए।
- ब्रॉयलर फार्मिंग (Broiler Farming): मांस उत्पादन के लिए।
मुर्गी पालन क्यों लाभकारी है?
- कम निवेश, अधिक लाभ – केवल एक शेड और कुछ मुर्गियों से शुरुआत की जा सकती है।
- तेज़ उत्पादन – ब्रॉयलर मुर्गी 40–45 दिन में तैयार हो जाती है।
- हमेशा मांग – अंडा और चिकन की खपत हर मौसम और हर जगह होती है।
- रोज़गार के अवसर – ग्रामीण युवाओं के लिए आत्मनिर्भर बनने का सरल तरीका।
- सरकारी सहायता – केंद्र और राज्य सरकारें सब्सिडी और प्रशिक्षण उपलब्ध कराती हैं।
मुर्गी पालन शुरू करने की स्टेप-बाय-स्टेप गाइड-
1. स्थान और शेड का चयन –
- फार्म ऐसी जगह हो जहाँ साफ-सफाई और पानी की पर्याप्त व्यवस्था हो।
- शेड हवादार और धूप से सुरक्षित होना चाहिए।
- ब्रॉयलर के लिए 1 वर्ग फीट जगह प्रति मुर्गी और लेयर के लिए 2 वर्ग फीट जगह पर्याप्त है।
2. नस्ल का चुनाव –
- ब्रॉयलर नस्लें: कॉब (Cobb), रॉस (Ross), आर्बर एकर्स।
- लेयर नस्लें: व्हाइट लेघॉर्न, रोड आइलैंड रेड।
- स्थानीय नस्लें भी पालन की जा सकती हैं, लेकिन व्यावसायिक दृष्टि से ये अधिक लाभकारी होती हैं।
3. शेड और उपकरण –
- फीडर (दाना डालने का बर्तन)
- ड्रिंकर (पानी पिलाने का बर्तन)
- ब्रूडर (चूजों को गर्म रखने का यंत्र)
- बिजली और साफ पानी की सुविधा
4. आहार और पोषण –
- मुर्गियों को उचित पोषण देना सबसे जरूरी है।
- ब्रॉयलर चूजों के लिए प्रोटीन युक्त आहार देना चाहिए।
- लेयर मुर्गियों को कैल्शियम युक्त आहार देना चाहिए ताकि अंडे का छिलका मजबूत बने।
- मक्का, चावल की भूसी, सोयाबीन खल, सरसों खल, मिनरल मिक्सचर का उपयोग किया जा सकता है।
5. देखभाल और स्वास्थ्य –
- शेड में साफ-सफाई रखना जरूरी है।
- समय-समय पर टीकाकरण कराना चाहिए।
- बीमार मुर्गियों को अलग कर देना चाहिए।
- फीड और पानी को कीटाणुरहित करना चाहिए।
6. उत्पादन और बिक्री –
- ब्रॉयलर मुर्गी: 40–45 दिन में 1.5–2 किलो की हो जाती है और बाजार में बिक जाती है।
- लेयर मुर्गी: 5–6 महीने की उम्र से अंडे देना शुरू कर देती है और लगभग 1.5 साल तक अंडे देती रहती है।
7. निवेश और कमाई –
छोटे स्तर पर (1000 ब्रॉयलर मुर्गियाँ) –
- निवेश: ₹1.5 से ₹2 लाख (चूजे, दाना, शेड, दवाइयाँ)
- कमाई: 45 दिन बाद ₹2.5 से ₹3 लाख
- लाभ: ₹80,000 से ₹1 लाख प्रति बैच
बड़े स्तर पर (5000 लेयर मुर्गियाँ) –
- निवेश: ₹6 से ₹7 लाख
- आय: प्रतिदिन 4000 से 4500 अंडे (₹5–6 प्रति अंडा)
- लाभ: प्रति माह ₹5 से ₹6 लाख
8. सरकारी योजनाएँ और सहायता
- राष्ट्रीय पशुधन मिशन (National Livestock Mission)
- प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम (PMEGP)
- डेयरी एवं पोल्ट्री फार्मिंग सब्सिडी योजनाएँ
- बैंक लोन और 25–40% तक सब्सिडी की सुविधा
चुनौतियाँ और समाधान
- बीमारियाँ फैलना – नियमित टीकाकरण और साफ-सफाई से समाधान।
- बाजार तक पहुँच – कोल्ड स्टोरेज और ट्रांसपोर्ट व्यवस्था जरूरी।
- फीड की लागत – स्थानीय अनाज और कृषि उप-उत्पाद का उपयोग करना चाहिए।
मुर्गी पालन के प्रकार
- मुर्गी पालन को केवल ब्रॉयलर और लेयर तक सीमित नहीं माना जाता। वास्तव में इसके कई प्रकार हैं –
ब्रॉयलर फार्मिंग
- मांस उत्पादन के लिए।
- 40–45 दिन में तैयार हो जाती है।
- बड़े शहरों में चिकन की सबसे अधिक खपत।
लेयर फार्मिंग
- अंडा उत्पादन के लिए।
- 1.5 साल तक लगातार अंडे देती रहती है।
- स्कूल मिड-डे मील, होटल, बेकरी और घरेलू खपत में उपयोग।
देशी मुर्गी पालन (Backyard Poultry Farming)
- ग्रामीण क्षेत्रों में अधिक लोकप्रिय।
- कम लागत और देसी नस्ल की मजबूत प्रतिरोधक क्षमता।
- अंडे और मांस दोनों की मांग अधिक रहती है क्योंकि इन्हें हेल्दी माना जाता है।
जैविक मुर्गी पालन (Organic Poultry Farming)
- मुर्गियों को दवाइयों और हार्मोन के बजाय प्राकृतिक दाना और वातावरण दिया जाता है।
- ऐसे अंडे और मांस बाजार में महंगे बिकते हैं।
- शहरी क्षेत्रों और विदेशी बाजारों में भारी मांग।
मुर्गी पालन के लिए प्रशिक्षण और ज्ञान
- मुर्गी पालन शुरू करने से पहले थोड़ी तकनीकी जानकारी और प्रशिक्षण लेना बेहद जरूरी है।
- केंद्रीय पोल्ट्री अनुसंधान संस्थान (ICAR – Central Poultry Research Institute) समय-समय पर प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित करता है।
- कृषि विज्ञान केंद्र (KVK) में किसानों और युवाओं के लिए 5–7 दिन के ट्रेनिंग कोर्स उपलब्ध होते हैं।
- निजी कंपनियाँ और NGO भी पोल्ट्री मैनेजमेंट का प्रशिक्षण देते हैं।
प्रशिक्षण से मिलने वाले लाभ:
- नस्लों की पहचान और चयन
- टीकाकरण की विधि
- शेड मैनेजमेंट
- आहार संतुलन
- रोग पहचान और रोकथाम
मुर्गी पालन के लिए आधुनिक तकनीकें
डीप लिटर सिस्टम (Deep Litter System):
- मुर्गियों को फर्श पर लकड़ी की बुरादे या भूसी बिछाकर पाला जाता है।
- साफ-सफाई आसान और कम लागत वाला तरीका।
केज सिस्टम (Cage System):
- मुर्गियों को लोहे या प्लास्टिक के केज में रखा जाता है।
- मुख्यतः लेयर फार्मिंग में उपयोगी।
- कम जगह में अधिक उत्पादन।
बायो-सिक्योरिटी सिस्टम (Bio-Security):
- रोगों से बचाव के लिए शेड को कीटाणुरहित करना।
- बाहर से आने वाले लोगों और वाहनों का प्रवेश सीमित करना।
स्वचालित उपकरण (Automatic Equipment):
- ऑटोमैटिक फीडर, ड्रिंकर, अंडा कलेक्टर।
- बड़े फार्म में श्रम और समय की बचत।
मार्केटिंग और बिक्री की रणनीति
- मुर्गी पालन में उत्पादन जितना जरूरी है, उतना ही जरूरी है सही मार्केटिंग।
- स्थानीय बाजार: कसाई की दुकानें, मंडियाँ और होटल।
- थोक खरीदार: बड़ी होटल चेन, मॉल और रिटेल स्टोर।
- प्रत्यक्ष बिक्री: गाँव या शहर में अपनी दुकान खोलकर सीधी बिक्री।
- ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म: आजकल ऑनलाइन ताजा चिकन और अंडे की होम डिलीवरी भी ट्रेंड में है।
👉 यदि किसान सीधे उपभोक्ता तक पहुँचते हैं तो उन्हें बिचौलियों पर निर्भर नहीं रहना पड़ता और मुनाफा दोगुना हो जाता है।
मुर्गी पालन में सफलता पाने के लिए जरूरी टिप्स –
- छोटे स्तर से शुरुआत करें – धीरे-धीरे विस्तार करें।
- अच्छी नस्ल का चुनाव करें – बाजार की मांग को ध्यान में रखकर।
- फीड की गुणवत्ता पर समझौता न करें – क्योंकि उत्पादन सीधे उस पर निर्भर है।
- स्वास्थ्य पर ध्यान दें – नियमित टीकाकरण और शेड की सफाई।
- बाजार से जुड़े रहें – ताकि समय पर बिक्री और बेहतर दाम मिल सके।
- सरकारी योजनाओं का लाभ उठाएँ – सब्सिडी और लोन से लागत कम होती है।
महिला उद्यमिता और मुर्गी पालन
- भारत में महिलाओं की भागीदारी कृषि और पशुपालन में हमेशा से रही है। मुर्गी पालन महिलाओं के लिए सबसे उपयुक्त व्यवसाय माना जाता है क्योंकि –
- इसे घर के पास छोटे स्तर पर भी किया जा सकता है।
- अंडों की बिक्री से रोज़ाना नकद आय प्राप्त होती है।
- महिलाएँ स्वयं सहायता समूह (Self Help Group) बनाकर सामूहिक रूप से पोल्ट्री फार्म चला सकती हैं।
- NABARD और अन्य सरकारी संस्थाएँ महिला उद्यमियों को विशेष लोन और सब्सिडी प्रदान करती हैं।
मुर्गी पालन और रोजगार के अवसर
- फार्मिंग: किसान सीधे पालन करके कमाते हैं।
- फीड इंडस्ट्री: चारे और दाने की फैक्ट्री।
- दवा और टीका उद्योग: पोल्ट्री स्वास्थ्य से जुड़ा बड़ा उद्योग।
- प्रोसेसिंग यूनिट: चिकन और अंडों को पैक करके शहरों व विदेशों में सप्लाई करना।
- ट्रांसपोर्ट और लॉजिस्टिक्स: मुर्गियों और अंडों को बाजार तक पहुँचाना।
👉 अनुमान है कि पोल्ट्री उद्योग में प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से 3 करोड़ से अधिक लोग रोजगार प्राप्त कर रहे हैं।
मुर्गी पालन का भविष्य
भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा अंडा उत्पादक और चौथा सबसे बड़ा चिकन उत्पादक देश है। शहरीकरण और बढ़ती आबादी के साथ अंडे और मांस की खपत तेज़ी से बढ़ रही है। आने वाले समय में जैविक मुर्गी पालन (Organic Poultry Farming) की मांग भी बढ़ेगी।
सरकार का लक्ष्य है कि 2030 तक भारत को अंडे और पोल्ट्री उत्पादन में आत्मनिर्भर बनाया जाए। ऐसे में यह क्षेत्र ग्रामीण युवाओं और किसानों के लिए रोजगार का बड़ा साधन बनेगा।
निष्कर्ष
मुर्गी पालन एक ऐसा व्यवसाय है जिसे कोई भी किसान, बेरोजगार युवा या महिला समूह बहुत कम लागत में शुरू कर सकता है। यदि सही नस्ल, अच्छा आहार और उचित देखभाल की जाए तो इसमें बेहद अच्छा मुनाफा मिलता है। सरकारी योजनाओं और आधुनिक तकनीकों की मदद से यह व्यवसाय और भी आसान और लाभकारी बनता जा रहा है।
