
मेथी उगाने का सही तरीका सर्दी में – मेथी एक स्वादिष्ट हरी सब्जी है जिसे आप खा सकते हैं। यह शरीर के लिए बहुत फायदेमंद है क्योंकि इसमें आयरन, कैल्शियम, प्रोटीन और फाइबर जैसे पोषक तत्व पाए जाते हैं। भारत में लोग इसे सर्दियों में उगाना पसंद करते हैं क्योंकि इसे ठंडा मौसम पसंद है। आप मेथी को बड़े खेतों में, गमलों में या घर की बालकनी में भी उगा सकते हैं। मेथी खाने से मधुमेह, उच्च रक्तचाप और पेट की समस्याओं जैसी स्वास्थ्य समस्याओं में फायदा हो सकता है।
मेथी की खेती के लिए उपयुक्त जलवायु
- मेथी की सबसे अच्छी वृद्धि सर्दियों में होती है। इसे अक्टूबर से जनवरी के बीच लगाना चाहिए। इसे 15°C से 25°C के बीच का तापमान पसंद होता है। अत्यधिक गर्मी या भारी बारिश पौधों को नुकसान पहुंचा सकती है। ठंडी सर्दियाँ और हल्की हवाएँ पत्तियों को कोमल, हरा और स्वस्थ बनाए रखने में मदद करती हैं।
मेथी उगाने का सही तरीका
मिट्टी का चुनाव
- पौधरोपण से पहले, खेत को अच्छी तरह जोत लें और उसमें लगभग 20 क्विंटल प्रति एकड़ पुरानी गोबर की खाद मिला दें ताकि पौधे अच्छे से बढ़ सकें। मेथी की जड़ें उथली होती हैं, इसलिए इसे उगने के लिए बहुत गहरी मिट्टी की आवश्यकता नहीं होती है।
- इसे नरम और रेतीली मिट्टी का मिश्रण पसंद है, जिसे बलुई दोमट मिट्टी कहते हैं। मेथी के लिए सबसे अच्छा pH (मिट्टी की अम्लता या क्षारीयता) 6.0 से 7.5 के बीच होता है, जो हल्का अम्लीय से उदासीन होता है। यदि आप मेथी को गमले में उगा रहे हैं, तो मिट्टी, रेत और खाद को 2 भाग मिट्टी, 1 भाग रेत और 1 भाग खाद के अनुपात में मिला लें।
मेथी की किस्में
- किस्म का नाम, बीज बोने का समय, कटाई का समय, विशेषताएँ
- पूसा (अक्टूबर-नवंबर): 35-40 दिन, जल्दी पकने वाली, हरी और कोमल पत्तियाँ
- कसूरी (अक्टूबर-दिसंबर): 45-50 दिन, सुगंधित, मसाला बनाने और सुखाने के लिए उपयुक्त
- राजेंद्र (नवंबर): 40 दिन, उच्च उपज देने वाली और रोग प्रतिरोधी
- अंबिका (अक्टूबर): 30-35 दिन, छोटे पौधे, तेजी से बढ़ने वाले
बीज की तैयारी
- एक एकड़ जमीन के लिए लगभग 4 से 5 किलोग्राम बीजों की आवश्यकता होती है। बोने से पहले, बीजों को गर्म पानी में डालकर 8 घंटे के लिए छोड़ दें—इससे उनका अंकुरण तेजी से होता है। यदि आप चाहें, तो बीजों को रोगों से बचाने के लिए उन पर ट्राइकोडर्मा पाउडर नामक प्राकृतिक औषधि भी छिड़क सकते हैं।
बुवाई का तरीका
- मिट्टी को अच्छी तरह समतल कर लें। बीजों को हाथ से या किसी विशेष उपकरण की सहायता से लगभग 2 से 3 सेंटीमीटर गहराई में बोएं। बीजों को पंक्तियों में 20 सेंटीमीटर की दूरी पर लगाएं और प्रत्येक बीज को दूसरे बीज से लगभग 10 सेंटीमीटर की दूरी पर बोएं। बोने के बाद, मिट्टी को हल्का पानी दें ताकि बीज अच्छी तरह जम जाएं। 3 से 4 दिनों में बीज अंकुरित होकर छोटे पौधे बन जाएंगे।
सिंचाई
- मेथी को ज्यादा पानी की जरूरत नहीं होती, लेकिन मिट्टी थोड़ी नम रहनी चाहिए। बीज बोते ही तुरंत पानी दें। लगभग एक से दस दिन बाद फिर से पानी दें। उसके बाद, हर 10 से 12 दिन में हल्का पानी दें। ध्यान रहे कि ज्यादा पानी न दें, क्योंकि ज्यादा पानी जड़ों को नुकसान पहुंचा सकता है और पौधे को बीमार कर सकता है।
खाद एवं पोषक तत्व प्रबंधन
- यदि आप प्राकृतिक तरीके से पौधे उगाना चाहते हैं, तो आप नीम की खली (नीम के बीजों से बना एक प्राकृतिक उर्वरक) और तरल पदार्थों से बना विशेष जैविक पौध आहार का उपयोग कर सकते हैं।
निराई-गुड़ाई
- बीज बोने के बाद 15 दिन तक प्रतीक्षा करें और फिर उगे हुए खरपतवारों को हटा दें। इससे पौधों को बेहतर विकास करने में मदद मिलती है क्योंकि उन्हें भोजन के लिए खरपतवारों से प्रतिस्पर्धा नहीं करनी पड़ती। यदि आवश्यक हो, तो पहले खरपतवार हटाने के 10 दिन बाद दोबारा खरपतवार हटाएँ। खरपतवार हटाने के बाद, पौधों को थोड़ा पानी दें ताकि मिट्टी नरम और पौधों के लिए उपजाऊ बनी रहे।
रोग और कीट नियंत्रण
मुख्य रोग:
- पत्तियां मुरझाना, जड़ सड़न
नियंत्रण:
- जो भी पौधे बीमार हों, उन्हें तुरंत हटा दें। उन पर ट्राइकोडर्मा नामक एक विशेष लाभकारी फफूंद या नीम के तेल नामक प्राकृतिक तेल का छिड़काव करें, इसके लिए एक लीटर पानी में 3 मिलीलीटर नीम का तेल मिलाएं।
मुख्य कीट:
- एफिड्स छोटे काले कीड़े होते हैं जो पौधों पर पाए जाते हैं। लीफ माइनर छोटे कीड़े होते हैं जो पौधों की पत्तियों के अंदर छेद करके रहते हैं।
नियंत्रण:
- पौधों पर नीम का तेल या प्राकृतिक कीटनाशक स्प्रे छिड़कें। पौधों के बीच पर्याप्त जगह रखें और सुनिश्चित करें कि उनके आसपास हवा आसानी से प्रवाहित हो सके।
कटाई
- मेथी लगभग 25 से 30 दिनों में तोड़ने के लिए तैयार हो जाती है। जब पौधे लगभग 15 से 20 सेंटीमीटर लंबे हो जाएं, तो आप उन्हें जड़ों समेत धीरे से उखाड़ सकते हैं या फिर ऊपर से काट सकते हैं। अगर आप मेथी को बीज प्राप्त करने के लिए उगाना चाहते हैं, तो बीज तैयार होने तक लगभग 80 से 90 दिनों तक इंतजार करें। फिर, बीजों को धूप में सुखाकर बाद में उपयोग के लिए रख लें।
उपज
- हरी मेथी उगाने से प्रति एकड़ लगभग 80 से 100 यूनिट उपज मिलती है, जबकि बीज वाली मेथी उगाने से प्रति एकड़ लगभग 6 से 8 यूनिट उपज मिलती है। रसायनों के बिना प्राकृतिक रूप से उगाने से यह बेहतर होती है और बेचने पर अधिक मूल्यवान साबित होती है।
लागत और मुनाफा
- एक एकड़ जमीन पर कुछ उगाने में लगभग 15,000 से 20,000 रुपये का खर्च आता है। जब आप अपनी उगाई हुई फसल बेचते हैं, तो प्रति एकड़ 60,000 से 80,000 रुपये तक की कमाई हो सकती है। इसका मतलब है कि सभी खर्चों के बाद, आपको प्रति एकड़ लगभग 40,000 से 60,000 रुपये का मुनाफा हो सकता है। यहां तक कि अगर आप बालकनी जैसी छोटी सी जगह में भी थोड़ी सी फसल उगाते हैं, तो यह भी पैसे कमाने का एक अच्छा तरीका हो सकता है।
भंडारण और विपणन
- मेथी तोड़ने के बाद, इसे ठंडी और छायादार जगह पर रखें ताकि यह ताज़ी बनी रहे। इसे स्टोर करने के लिए सबसे अच्छा तापमान 4°C से 6°C के बीच होता है, जो ठंडा तो होता है लेकिन जमा देने वाला नहीं। आप मेथी को आस-पास के सब्जी बाजारों, रेस्तरां या किराना स्टोरों में बेच सकते हैं। मेथी को अच्छी तरह सुखाकर और पैक करके बेचने से आपको अधिक लाभ हो सकता है।
मेथी की खेती के फायदे
- यह एक ऐसा पौधा है जो तेजी से बढ़ता है और महज 30 दिनों में तोड़ने के लिए तैयार हो जाता है। इसे उगाना सस्ता है लेकिन इससे अच्छी कमाई हो सकती है। सर्दियों में बहुत से लोग इसे चाहते हैं। यह सेहत के लिए अच्छा है क्योंकि इसमें खास औषधीय गुण होते हैं। आप इसे लगभग कहीं भी उगा सकते हैं—गमले में, खेत में या फिर बालकनी में भी!
निष्कर्ष
मेथी उगाना आसान, सस्ता और तेज़ है, खासकर सर्दियों में। चाहे आपके पास बड़ा खेत हो या छोटी बालकनी, थोड़ी सी देखभाल से आप सेहतमंद और स्वादिष्ट मेथी के पौधे उगा सकते हैं। अच्छी मिट्टी का इस्तेमाल करें, पौधों को पर्याप्त पानी दें और प्राकृतिक खाद डालें, तो वे अच्छे से उगेंगे और आपके शरीर के लिए फायदेमंद होंगे।
