
नमकीन बनाने का व्यवसाय – भारत एक ऐसा देश है जहाँ खाने-पीने की परंपराएँ बहुत समृद्ध हैं। चाय के साथ बिस्किट हो, शाम के समय चखना हो, या फिर त्योहारों पर मेहमानों की आवभगत – नमकीन और चिप्स हमेशा हर घर की पहली पसंद रहे हैं। यही वजह है कि नमकीन और चिप्स बनाने का व्यवसाय (Namkeen & Chips Manufacturing Business) छोटे स्तर से लेकर बड़े पैमाने तक हर जगह लाभदायक माना जाता है।
नमकीन बनाने का व्यवसाय
नमकीन बनाने का व्यवसाय की खासियत यह है कि इसमें कच्चा माल आसानी से मिल जाता है, मांग हर मौसम में बनी रहती है, और अगर आप स्वाद और गुणवत्ता का ध्यान रखें तो ब्रांड बनाने का सुनहरा मौका भी मिलता है।
आज इस ब्लॉग में हम विस्तार से जानेंगे कि नमकीन बनाने का व्यवसाय कैसे शुरू किया जा सकता है, इसके लिए किन मशीनों, कच्चे माल और लाइसेंस की ज़रूरत होती है, कितना निवेश करना पड़ता है, और इसमें कमाई की संभावनाएँ कितनी हैं।
भारत में नमकीन और चिप्स की मांग
- भारत में स्नैक्स इंडस्ट्री की मार्केट 60,000 करोड़ रुपये से अधिक है।
- अकेले नमकीन और चिप्स का बाजार लगभग 70% हिस्सेदारी रखता है।
- हर शहर, कस्बे और गाँव में इसकी खपत रोजाना होती है।
- त्योहारों पर इनकी मांग कई गुना बढ़ जाती है।
- छोटे पैकेट से लेकर बड़े पैक तक हर वर्ग के लोग इन्हें खरीदते हैं।
इससे साफ है कि नमकीन और चिप्स का व्यवसाय कभी भी घाटे का सौदा नहीं हो सकता, बशर्ते आप इसे सही तरीके से चलाएँ।
नमकीन और चिप्स व्यवसाय शुरू करने की तैयारी
- बिज़नेस प्लान तैयार करें
- सबसे पहले यह तय करें कि आप किस स्तर पर काम शुरू करना चाहते हैं –
- घरेलू स्तर (Home Based)
- छोटा उद्योग (Small Scale)
- मध्यम उद्योग (Medium Scale)
- बड़ा उद्योग (Large Scale / Factory)
तय करें कि आप किस प्रकार का उत्पाद बनाएंगे –
- आलू के चिप्स
- केले के चिप्स
- मूंगफली नमकीन
- भुजिया (आलू, बेसन, मटर, मूंग दाल)
- मिश्रित नमकीन (Mix Namkeen)
- कॉर्नफ्लेक्स मिक्सचर
- सेव-पापड़ी आदि
- स्थान का चुनाव
- छोटे स्तर पर आप 200–700 वर्ग फीट जगह से काम शुरू कर सकते हैं।
- मध्यम स्तर पर कम से कम 2000–2500 वर्ग फीट जगह चाहिए।
- जगह साफ-सुथरी होनी चाहिए और पानी-बिजली की पर्याप्त सुविधा हो।
- व्यवसाय पंजीकरण और लाइसेंस
- FSSAI लाइसेंस – फूड बिज़नेस के लिए अनिवार्य।
- MSME/Udyam Registration – सरकार की सब्सिडी और लोन सुविधा के लिए।
- GST Registration – टैक्स और बिलिंग के लिए।
- ट्रेड लाइसेंस – स्थानीय निकाय से लेना होगा।
- ब्रांड रजिस्ट्रेशन (Trademark) – अपनी कंपनी/ब्रांड का नाम सुरक्षित करने के लिए।
नमकीन और चिप्स बनाने में लगने वाला कच्चा माल
- आलू/केला/मूंगफली/चना/दालें/बेसन – उत्पाद के प्रकार के अनुसार।
- तेल (Refined / Mustard / Palm Oil) – तलने के लिए।
- नमक, मिर्च पाउडर, काली मिर्च, अजवाइन, मसाले – स्वाद के लिए।
- पैकिंग मटेरियल – प्लास्टिक पाउच, प्रिंटेड पैकेट, डिब्बे आदि।
- अन्य सामग्री – प्याज पाउडर, लहसुन पाउडर, कसूरी मेथी, सूखा मसाला।
छोटे स्तर पर आवश्यक मशीनरी और उपकरण
- आलू छीलने की मशीन
- स्लाइसर मशीन
- फ्राइंग पैन / कढ़ाई (गैस या डीजल से चलने वाली)
- मसाला मिक्सिंग मशीन
- पाउच सीलिंग मशीन
मध्यम और बड़े स्तर पर
- पोटेटो पीलिंग मशीन (Potato Peeler)
- स्लाइसर मशीन (Automatic)
- ऑयल फ्राइंग मशीन (Batch Type/Continuous Fryer)
- डिहाइड्रेशन मशीन (Moisture निकालने के लिए)
- सीजनिंग और मसाला मिक्सिंग मशीन
- पैकिंग मशीन (Automatic Form Fill & Seal)
- वेटिंग स्केल और लेबलिंग मशीन
निवेश और लागत
छोटा व्यवसाय (घर से या छोटे यूनिट)
- मशीनरी : ₹80,000 – ₹1,50,000
- कच्चा माल : ₹20,000 – ₹50,000
- पैकिंग : ₹15,000 – ₹25,000
- अन्य खर्च : ₹25,000 – ₹50,000
कुल लागत : ₹1.5 – ₹3 लाख
मध्यम स्तर का उद्योग
- मशीनरी : ₹5 – ₹8 लाख
- कच्चा माल : ₹1 – ₹2 लाख
- स्टाफ वेतन, किराया, पैकिंग : ₹2 – ₹3 लाख
कुल लागत : ₹10 – ₹15 लाख
बड़ा उद्योग
- मशीनरी : ₹25 – ₹50 लाख
- कच्चा माल : ₹5 – ₹10 लाख
- मार्केटिंग, डिस्ट्रीब्यूशन, स्टाफ : ₹15 – ₹20 लाख
कुल लागत : ₹50 लाख – ₹1 करोड़
उत्पादन प्रक्रिया (Step by Step)
- आलू चिप्स बनाने की प्रक्रिया
- आलू को अच्छे से धोना।
- पोटेटो पीलर मशीन से छीलना।
- स्लाइसर मशीन से पतले टुकड़े करना।
- आलू को पानी में भिगोकर स्टार्च निकालना।
- तेल में तलना।
- मसाला मिक्सिंग मशीन में डालकर स्वाद अनुसार नमक/मसाले मिलाना।
- ठंडा होने पर पैकिंग करना।
- नमकीन बनाने की प्रक्रिया
- बेसन/आटे से सेव या भुजिया बनाना।
- मशीन से निकालकर तेल में तलना।
- मूंगफली, दालें, कॉर्नफ्लेक्स आदि को भी फ्राई करना।
- सभी सामग्री को मसाला मिक्सर में डालकर मिलाना।
- पैकिंग मशीन से अलग-अलग पैकेट तैयार करना।
पैकेजिंग और ब्रांडिंग
- पैकेजिंग आकर्षक और एयरटाइट होनी चाहिए।
- छोटे पैक (₹10, ₹20) और बड़े पैक (₹100, ₹200) दोनों बनाएं।
- पैकेट पर FSSAI नंबर, मैन्युफैक्चरिंग डेट, एक्सपायरी डेट और ब्रांड का नाम ज़रूर लिखें।
- आकर्षक पैकेट ग्राहक को खींचते हैं।
मार्केटिंग और बिक्री
- स्थानीय स्तर पर बिक्री – किराना स्टोर, सुपरमार्केट, चाय स्टॉल।
- डिस्ट्रीब्यूटर नेटवर्क – थोक विक्रेताओं के जरिए।
- ऑनलाइन प्लेटफॉर्म – Amazon, Flipkart, BigBasket, Jiomart पर।
- फूड डिलीवरी ऐप्स – Swiggy, Zomato पर लिस्टिंग।
- सोशल मीडिया मार्केटिंग – Facebook, Instagram, YouTube पर प्रमोशन।
- फेस्टिवल ऑफर्स – त्योहारों पर गिफ्ट पैक लॉन्च करें।
लाभ और कमाई की संभावना
- 1 किलो आलू से लगभग 250–300 ग्राम चिप्स बनते हैं।
- 1 किलो आलू की कीमत = ₹20–₹25
- तेल और मसाले = ₹20–₹25
- पैकेजिंग और अन्य खर्च = ₹10
- कुल लागत = ₹50–₹60
- बाजार में 250 ग्राम आलू चिप्स का दाम = ₹90–₹120
- यानी लगभग 40–60% का मुनाफा।
- इसी तरह नमकीन पर भी 30–50% तक का मुनाफा आसानी से मिलता है।
सरकारी योजनाएँ और सहायता
- प्रधानमंत्री मुद्रा योजना (PMMY) – 10 लाख तक का बिना गारंटी लोन।
- स्टार्टअप इंडिया योजना – नए उद्यमियों को सहायता।
- MSME Subsidy – मशीनों पर 25–35% सब्सिडी।
- KVIC (खादी ग्रामोद्योग) – फूड प्रोसेसिंग यूनिट के लिए सहायता।
चुनौतियाँ
- बड़ी कंपनियों (Haldiram’s, Balaji, Lays) से प्रतिस्पर्धा।
- गुणवत्ता और स्वाद बनाए रखना।
- लगातार बदलते ग्राहक स्वाद को समझना।
- अच्छी पैकेजिंग और सप्लाई चेन मैनेजमेंट।
निष्कर्ष
नमकीन बनाने का व्यवसाय कभी खत्म न होने वाला व्यवसाय है। लोग हमेशा स्नैक्स चाहते हैं, और यदि आप अच्छा स्वाद, साफ-सुथरा उत्पादन, और सही मार्केटिंग करते हैं तो छोटा व्यवसाय भी बड़ा ब्रांड बन सकता है।
नमकीन बनाने का व्यवसाय में कम लागत, ज्यादा मुनाफा और असीमित विकास की संभावना है। नमकीन बनाने का व्यवसाय आप चाहे छोटे स्तर पर घर से शुरू करें या बड़े स्तर पर फैक्ट्री लगाएँ, मेहनत और गुणवत्ता से आप करोड़ों का कारोबार खड़ा कर सकते हैं।
